धनवान सेठ की कहानी (जीवन का सत्य) Motivation story

जीवन का सत्य (धनवान सेठ की कहानी)

क्या आपने कभी सोचा है कि मेरे इस मानवीय जीवन का क्या अस्तित्व है। मेरे लिए इस मानव जीवन, जो कि ईश्वर की अनमोल देन है उसकी क्या महत्त्वता है। क्या आपने कभी अपने आप को गहराड़यों से जानने का, समझने का प्रयास किया है मानवीय तौर पर कहा जाए तो हम इस जीवन को सिर्फ अपनी जरुरतों को पूरा करते-करते ही व्यतीत कर देते हैं। एक मनुष्य के लिए उसकी जरूरत क्या है रोटी, कपड़ा और मकान यही न, पर यह असल सत्य नहीं है।

हर मनुष्य का जन्म इस धरती पर एक विशेष कारण से होता है। जिसे हम धीरे-धीरे समय के साथ समझते चले जाते हैं। कई लोग अपने इस मानवीय जीवन के सत्य को समझ ही नहीं पाते क्योंकि वे हमेशा नकारात्मक सोच ही रखते हैं। यही अंतर है नकारात्मक और सकारात्मक सोच में, जहाँ नकारात्मक सोच हमारे लिए समस्याँए पैदा करती है वही सकारात्मक सोच हमारे लिए नए अवसर लाती है। आइए हम जीवन के इस सत्य को एक कहानी द्‌वारा समझने की कोशिश करते हैं।

धनवान सेठ की कहानी

👉 एक गांव में एक बहुत बड़ा धनवान व्यक्ति रहता था। लोग उसे सेठ धनीराम कहते थे। उस सेठ के पास प्रचुर मात्रा में धन संपत्ति थी जिसके कारण उसके सगे-संबंधी, रिश्तेदार,भाई-बहन हमेशा उसे घेरे रहते थे वे उन्हीं के राग अलापते रहते थे, सेठ भी उन सभी लोगों की काफी मदद करता था। तभी अचानक कुछ समय बाद सेठ को भंयकर रोग लग गया।

👉 इस भयंकर बीमारी का सेठ ने बहुत उपचार करवाया लेकिन इसका इलाज नहीं हो सका। आख़िरकार सेठ की मृत्यु हो गई। यमदूत उस सेठ को अपने साथ ले जाने के लिए आ गए, जैसे ही यमदूत सेठ को ले जाने लगे तभी सेठ थोड़ी दूर जाकर यमदूतो से प्रार्थना करने लगे कि “मुझे थोड़ा सा समय दे दो, मैं लौटकर तुरंत आता हूँ” दूतों ने उसे अनुमति दे दी।

👉 सेठ लौटकर आया, चारो ओर नज़रे घुमायीं और वापस यमदूतों के पास आकर बोला- “शीघ्र चलिए” यमदूत उसे इस प्रकार अपने साथ चलने के लिए तैयार देखकर चकित रह गए और सेठ से इसका कारण पूछा। सेठ ने निराशा भरे स्वरों में कहा- “मैंने हेराफेरी करके अपार धन एकत्रित किया था, लोगों को खूब खिलाया-पिलाया और उनकी बहुत मदद भी की, सोचा था कि वो मेरा साथ कभी नहीं छोडेंगे। अब जब मैं इस दुनिया को सदा के लिए छोड़ कर जा रहा हूँ, तो वे सब बदल गए है मेरे लिए दुखी होने के बजाय, ये अभी से मेरी संपत्ति को बांटने की योजना बनाने लगे है किसी को मेरे लिए जरा-सा भी अफसोस नहीं है।”

👉 सेठ की बात सुनकर यमदूत बोले- “इस संसार में प्राणी अकेला ही आता है और अकेला ही जाता है, इंसान जो भी अच्छा या बुरा कर्म करता है उसे इसका परिणाम स्वयं ही भुगतना पड़ता है, हर प्राणी इस सत्य को समझता तो है पर देर से।”

जीवन की सीख

👉 हम इस बात को अपने जीवन में भी देख रहे हैं। लोग जीवन के सत्य को भूलकर मानव द्वारा बनाए गए जाल जैसे लालच, रूपए-पैसा, बुराई आदि तले दब गए हैं।

👉 आप जो भोजन ग्रहण करते है वह पेट में 5 घंटे रहता है, जो वस्त्र पहनते है वह 6 महीने रहता है, लेकिन जो ज्ञान आप हासिल करते हैं वह आपके अंतिम सांस तक साथ रहता है और संस्कार बनकर आपकी अगली पीढी तक पहुँचता है, ज्ञान का बीज कभी व्यर्थ नहीं जाता। जो है जितना है सफल करते चलो, सफल करने से ही सफलता मिलती है।

👉 हर व्यक्ति को सकारात्मक तरीके से देखो, सुनो और समझो। हम जितना ज्यादा पढ़ते है, सुनते है, समझते है, हमें अपनी कमियों का उतना ही ज्यादा एहसास होता है और इसी कमी को दूर करके हम सफलता की मंजिल की और अपने कदम बढ़ाते चले जाते हैं।

“क्या लेकर आया था जो क्या लेकर जाएगा,
   कर कुछ ऐसा जाओ कि लोग तुम्हें याद रख जाएगें।”

 

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